Tuesday, December 7, 2021

क्या है FELUDA टेस्ट जो मिनटों में देता है कोरोना रिपोर्ट, RT-PCR से कितना है बेहतर? जानें

नई दिल्ली: देश में कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप जारी है. तेजी से इसके मामले सामने आ रहे हैं. ऐसे में कोविड-19 की टेस्टिंग को बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है. कोरोना टेस्ट के लिए आरटी-पीसीआर के नतीजे सबसे ज्यादा भरोसेमंद साबित हुआ है. लेकिन फेलुदा टेस्ट इसके मुकाबले सस्ते हैं. इसके रिपोर्ट्स भी जल्दी आते हैं.

कैसे पड़ा इस टेस्ट का नाम फेलुदा?
इस टेस्ट का नाम फेलुदा रखा गया है. इसका पूरा नाम  FELUDA यानी FNCAS9 Editor Linked Uniform Detection Assay है.  काउंसिल ऑफ साइंटिफिक ऐंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) और टाटा ग्रुप के युवा वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस टेस्‍ट को विकसित किया है. इस टेस्ट को तैयार करने वाली टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. देबज्योति चक्रवर्ती और सौविक मैत्री ने इसका नामकरण किया है. देबज्योति चक्रवर्ती ने इस टेस्ट का नाम मसहूर फिल्ममेकर सत्यजीत रे के काल्पनिक जासूसी चरित्र फेलुदा के नाम पर रखा है.

45 मिनट में आ जाता है रिपोर्ट 
सीएसआईआर के मुताबिक, फेलुदा टेस्ट की एक्‍युरेसी आरटी-पीसीआर टेस्‍ट के ही बराबर है.लेकिन, इस टेस्‍ट का नतीजा एक घंटे से भी कम यानी 45 मिनट में आ जाता है. वहीं आरटी-पीसीआर टेस्ट की रिपोर्ट आने में ज्यादा समय लगता है. 
 
कैसे होता है फेलुदा टेस्ट?
फेलुदा टेस्ट पेपर स्ट्रिप के जरिए किए जाने वाले प्रेग्‍नेंसी टेस्‍ट जैसा है. इसमें एक पेपर स्ट्रिप होती है जो सैम्‍पल में वायरस की मौजूदगी पर अपना रंग बदलती है. किट में दो लाइनें होती हैं एक कंट्रोल के लिए और दूसरी नतीजे बताने के लिए. जबकि आरटी-पीसीआर टेस्ट में भारी भरकम उपकरण की जरूरत पड़ती है. RT-PCR के उपकरण और रीजेंट्स महंगे होते हैं और उसके लिए तकनीकी दक्षता की जरूरत पड़ती है. CSIR-IGIB के सीनियर साइंटिस्‍ट डॉ देबज्‍योति चक्रवर्ती के अनुसार, फेलुदा टेस्‍ट के लिए तकनीकी दक्षता की जरूरत नहीं है. यह वक्‍त, समय और पैसा बचाता है.

क्या है कीमत?
मार्केट में फेलुदा टेस्‍ट की कीमत करीब 500 रुपये है जबकि आरटी-पीसीआर टेस्‍ट 100 रुपये में हो जाता है. लेकिन फेलुदा टेस्‍ट किट को आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है जबकि आरटी-पीसीआर के लिए लैब चाहिए.

यह है फेलुदा टेस्ट की प्रक्रिया 
इस टेस्ट में सबसे पहले नाक से स्‍वाब लेते हैं. इसके बाद आरएनए निकालते हैं. फिर सिंगल स्‍टेप आरटी-पीसीआर करते हैं. मृत FnCas9 प्रोटीन, गाइड आरएनए और एम्प्लिफाइड वायरल डीएनए को इनक्‍यूबेट कर फेलुदा मिक्‍स तैयार किया जाता है.डिप स्टिक को फेलुदा मिक्‍स में डुबो देते हैं. स्ट्रिप पर मौजूद गोल्‍ड नैनोपार्टिकल फेलुदा कॉम्‍पलेक्‍स से चिपक जाता है.

इसके बाद टेस्‍ट लाइन पर स्‍ट्रेप्‍टावाइडिन का नाम एक प्रोटीन इस गोल्‍ड नैनोपार्टिकल को पकड़ लेता है. बाकी गोल्‍ड पार्टिकल्‍स कंट्रोल लाइन की पकड़ में आ जाते हैं.टेस्‍ट लाइन या कंट्रोल लाइन का रंग बदलता है. एक लाइन का मतलब निगेटिव और दो लाइन का मतलब पॉजिटिव रिजल्‍ट होता है. पूरे टेस्‍ट में एक से दो मिनट का वक्‍त लगता है.

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