Tuesday, December 7, 2021

ब्लैक फंगस से बचाव में रामबाण है ‘एम्फोटेरिसन-बी लाइपोसोमल’ इंजेक्शन, जानिए इसकी कीमत और इसके बारे में सबकुछ

नई दिल्लीः कोरोना महामारी के बीच इन दिनों ब्लैक फंगस का खतरा काफी बढ़ रहा है और देश के विभिन्न इलाकों से ब्लैक फंगस के मरीज बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं. बता दें कि ब्लैक फंगस से मरीज की आंखों की रोशनी भी जाने का डर है और साथ ही यह मरीज की जान पर भारी भी पड़ सकता है. लेकिन इस बीमारी का इलाज है एम्फोटेरिसिन-बी लाइपोसोमल इंजेक्शन. अगर मरीज को इस इंजेक्शन की डोज दी जाएं तो कोई खतरा नहीं है. हालांकि इस ब्लैक फंगस के मामले बढ़ने के साथ ही देश में एम्फोटेरिसिन बी लाइपोसोमल इंजेक्शन की कमी देखने को मिल रही है. 

क्या है एम्फोटेरिसिन बी लाइपोसोमल इंजेक्शन
यह एक एंटी फंगल इंजेक्शन है. यह शरीर में फंगस की ग्रोथ को रोक देता है, जिससे संक्रमण बढ़ने का खतरा खत्म हो जाता है. कोरोना संक्रमण के बाद कई मरीजों में ब्लैक फंगस या म्यूकरमाइकोसिस के मामले सामने आ रहे हैं. ऐसे में एम्फोटेरिसिन बी लाइपोसोमल (Amphotericin B Lyposomal) इंजेक्शन इसके इलाज में काफी कारगर है. ये इंजेक्शन मरीज को रोजाना लगाने की जरूरत पड़ती है और 15-20 दिन तक इस इंजेक्शन की डोज देने पड़ती है. इस इंजेक्शन की भारतीय बाजार में कीमत 7-8 हजार रुपए हो सकती है. चूंकि आजकल इस इंजेक्शन की काफी मांग है, इसलिए इसकी भारतीय बाजार में कमी भी देखी जा रही है. 

इस बात का ध्यान जरूर रखें कि इस इंजेक्शन के साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं. इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के इस इंजेक्शन का इस्तेमाल ना करें. 

कैसे होते हैं मरीज ब्लैक फंगस के शिकार
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैक फंगस या म्यूकरमाइकोसिस बीमारी म्यूकरमाइसिटीज नामक फंगस से होती है. यह फंगस हमारे वातावरण जैसे हवा, नमी वाली जगह, मिट्टी, गिली लकड़ी और सीलन भरे कमरों आदि में पाई जाती है. स्वस्थ लोगों को यह फंगस कोई नुकसान नहीं पहुंचाती है लेकिन जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर है, उन्हें इस फंगस से इंफेक्शन का खतरा है. 

कोरोना मरीजों को क्यों है ब्लैक फंगस से ज्यादा खतरा
कई कोरोना मरीजों में उनकी इम्यूनिटी ही उनकी दुश्मन बन जाती है और वह हाइपर एक्टिव होकर शरीर की सेल्स को ही तबाह करना शुरू कर देती है. ऐसे में डॉक्टर मरीज को इम्यूनिटी कम करने वाली दवाएं या स्टेरॉयड देते हैं. यही वजह है कि कोरोना मरीजों में ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ गया है. इसके अलावा डायबिटीज और कैंसर के मरीजों में भी इम्यूनिटी कमजोर होती है, जिससे उन्हें भी ब्लैक फंगस का खतरा ज्यादा होता है. 

ब्लैक फंगस आंखों और ब्रेन को पहुंचा रहा नुकसान
म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस मरीज के शरीर में घुसकर उसकी आंखों और ब्रेन को नुकसान पहुंचा सकता है. साथ ही स्किन को भी हानि पहुंचा सकता है. यही वजह है कि ब्लैक फंगस के मरीजों में आंख की रोशनी जाने और जबड़ा या नाक में संक्रमण फैलने की खबरें आ रही हैं. जिन्हें कई बार ऑपरेशन से निकालने की नौबत भी आ रही है. कई मामलों में यह मरीज की जान भी ले सकता है. 

ये हैं लक्षणः ब्लैक फंगस के लक्षण की बात करें तो इससे मरीज के चेहरे में एक तरफ दर्द या सुन्न होने की समस्या हो सकती है. इसके अलावा आंखों में दर्द, धुंधला दिखना या आंख की रोशनी जाना भी इसके संक्रमण के लक्षण हैं. नाकसे भूरे या काले रंग का डिस्चार्ज आना और चेहरे पर काले धब्बे, बुखार, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, जी मिचलाना, पेट दर्द और उल्टी आदि की समस्या भी हो सकती है. 

  

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