Saturday, December 4, 2021

क्या आप जानते हैं? कैसा होता है वो ICU जिसमें गंभीर मरीज को रखा जाता है, आसान भाषा में जानिए पूरी डिटेल

नई दिल्ली: कोरोना काल में आप ICU (intensive care unit) शब्द को बहुत सुन रहे हैं. ये बात सबको पता है कि गंभीर स्थिति होने पर मरीज को इस वार्ड में भर्ती किया जाता है, लेकिन क्या आप आईसीयू वार्ड के बारे में पूरी बात जानते हैं, जैसे इसके अंदर क्या होता है? डॉक्टर कैसे इलाज करते हैं?  क्या-क्या सावधानी रखी जाती हैं? आखिर क्यों इसे गहन देखभाल इकाई कहा जाता है. इस खबर में हम आपके इन्ही सवालों का जवाब लेकर आए हैं.

क्या है ICU 
आईसीयू यानी (इंटेंसिव केयर यूनिट) किसी भी अस्पताल की एक ऐसी इकाई है, जहां गंभीर रोगों से ग्रसित, ऑपरेशन व ट्रॉमा के मरीजों का इलाज किया जाता है. इस वार्ड में बीमारी के हिसाब से न्यूरो, सर्जिकल व मेडिकल आईसीयू अलग-अलग होते हैं. ऐसे में इनकी मशीनें और चिकित्सा भी भिन्न-भिन्न होती हैं. आईसीयू वार्ड को गहन देखभाल भी कहा जाता है, इससे तात्पर्य उन रोगियों को दिए गए विशेष उपचार से है, जो गंभीर रूप से अस्वस्थ होते हैं और उन्हें 24 घंटे कड़ी देखभाल की जरूरत होती है. 

आईसीयू के साधन
आईसीयू में अपने किसी सगे-संबंधी से जब आप मिलने जाते हैं, उन चीजों में से एक जो आपको चिंतित कर सकती हैं, वह आपके परिवार के सदस्य से जुड़े उपकरण और मशीनों की संख्या है. आईसीयू में कई प्रकार के कई उपकरण होते हैं, इनमें वेंटिलेटर, हॉर्ट मॉनिटर, फीड़िंग ट्यूब्स, ड्रैंस और कैथेटर मशीने शामिल हैं, जो जरूरत के हिसाब से मरीजों के इलाज में उपयोग में लाई जाती हैं.

किन लोगों को पड़ती है आईसीयू की जरूरत
गंभीर सर्जरी के बाद रिकवरी के लिए मरीजों को आईसीयू की जरूरत पड़ती है. कुछ लोगों को गंभीर ट्रॉमा की वजह से यहां रखना पड़ता है, जैसे सड़क हादसों में गंभीर रूप से ज़ख़्मी हुए लोगों को.

प्रशिक्षित हेल्थकेयर पेशेवरों को नियुक्त किया जाता है
आईसीयू में विशेष रूप से प्रशिक्षित हेल्थकेयर पेशेवरों को नियुक्त किया जाता है, जो मरीजों की देखभाल का काम करते हैं. यहां पर विशेष निगरानी उपकरण भी होते हैं. आईसीयू वार्ड में बहुत कम लोगों को मरीज से मिलने की अनुमति होती है. 

कैसे होती है मरीज की देखभाल
आईसीयू में मरीजों पर आईसीयू कर्मचारियों की एक टीम द्वारा बारीकी से निगरानी रखी जाती है और कई ट्यूबों, तारों और केबल्स द्वारा उपकरण से मरीजों को जोड़ा जाता है. आम तौर पर प्रत्येक एक या दो रोगियों के लिए एक नर्स होती है. जो मरीज स्वयं भोजन नहीं कर पाते हैं उन मरीजों को तरल पदार्थ और पोषक तत्व या अन्य तरल पदार्थ देने के लिए कई ट्यूब लगाने की भी संभावना होती है. 

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