Saturday, December 4, 2021

ज्यादा ना खाएं Zinc टैबलेट्स, इस गंभीर बीमारी के हो सकते हैं शिकार

नई दिल्लीः कोरोना संक्रमण के चलते लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है. साथ ही कोरोना के गंभीर मरीजों को डॉक्टर्स द्वारा स्टेरॉयड की डोज भी दी जा रही है. ऐसे में डॉक्टर्स मरीजों को जिंक की टैबलेट या जिंक की पर्याप्त मात्रा वाले फूड को खाने की सलाह दे रहे हैं. लेकिन अधिक मात्रा में जिंक लेने से मरीज फंगस की चपेट में आ रहे हैं. जो कि उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है. 

लोग ज्यादा क्यों खा रहे हैं जिंक टैबलेट्स?
बता दें कि जिंक इंसान की इम्यूनिटी को बढ़ाता है और मेटाबॉलिज्म को भी ठीक करता है. साथ साथ कोरोना संक्रमण से मरीज की स्वाद और गंध की सेंस को वापस लाने में भी जिंक मददगार होता है. यही वजह है कि कोरोना मरीजों को डॉक्टर्स जिंक की टैबलेट लेने की सलाह दे रहे हैं.

क्या है इससे नुकसान?
हाल ही में यूपी के गाजियाबाद में एक कोरोना मरीज के शरीर में येलो फंगस मिला है. जांच में पता चला है कि यह येलो फंगस छिपकली, सांप, मेढक, गिरगिट जैसे रेप्टाइल वर्ग के जंतुओं में पाया जाता है और यह जिंक की मौजूदगी में पनपता है. चूंकि कोरोना मरीज जिंक टैबलेट्स खा रहे हैं, ऐसे में येलो फंगस भी इंसानों में बढ़ रहा है. वहीं आयरन की इंसानी शरीर में अधिकता के चलते ब्लैक फंगस का संक्रमण बढ़ने की बात कही जा रही है.

येलो फंगस के क्या हैं लक्षण
येलो फंगस के लक्षणों की बात करें तो इनमें सुस्ती, थकान, वजन कम होना, भूख कम लगना या ना लगना, शरीर के इंफेक्शन वाली जगह पर मवाद पड़ना जैसे लक्षण शामिल हैं.  

ब्लैक फंगस ज्यादा खतरनाक
विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर येलो फंगस इंसानों में नहीं पाया जाता है. अभी तक जितने भी फंगस इंफेक्शन इंसानों में मिले हैं, उनमें सबसे खतरनाक ब्लैक फंगस को बताया जा रहा है. दरअसल ब्लैक फंगस खून में मिलने के बाद शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है. वहीं उपचार में देरी होने से इससे मरीज की आंखों की रोशनी भी जा सकती है और यह संक्रमण दिमाग तक पहुंच जाए तो जान भी जा सकती है. 

वैक्सीन की डोज लेने पर ब्लैक फंगस का खतरा भी कम
दैनिक जागरण की एक खबर के अनुसार, इंदौर के अरबिंदो अस्पताल में चेस्ट स्कैन कराने वाले 75 मरीजों का अध्ययन किया गया. जिसमें पता चला कि कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद ब्लैक फंगस के इंफेक्शन का खतरा भी कम है. दरअसल वैक्सीन लेने वाले 75 लोगों में से सिर्फ 9 में ब्लैक फंगस का इंफेक्शन मिला.   

  

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